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Saturday, 9 March 2019

आदि मानव

आदि मानव के बारे मे तो ठिक-ठिक से नही पता है। लेकिन जो 'पुरातत्वविद् ' को उस समय की जो वस्तुएँ मिली है उनके आधार पर अपनी सूझबूझ से अनुमान लगाया गया है। 

                                                   आरंभ मे मनुष्य भोजन और आश्रय की तलाश में झुंड बनाकर एक स्थान से दुसरे स्थान पर घुमते थे झुण्ड बनाकर इस लिए घुमते थे कि उस समय खुँखार जानवर जंगलो मे घुमते-फिरते रहते थे। इन जानवरों कि तुलना मे मनुष्य कमजोर था और उनके हथियार भी क्योकि इस सब का हथियार पत्थर का होता था। (धातु की खोज नही हुई थी ) इस लिए मनुष्य झुण्ड मे रहता था वह भोजन मे कंद-मूल, फल-फूल और थोड़ा-बहुत माँस भी खाते थे उनका मुख्य भोजन माँस नही था क्योकि उनलोगोंं के पास जो औजार मिले है उनसे बड़ी संख्या मे जानवर का शीकार नही हो सकता था।
                                                 रात के समय सभी प्राणी गुफा मे जमा हो जाते थे और गुफा के मुँह पर आग जला देते थे आग की डर से जानवर गुफा के भितर नही जाता था
                                    आग का अविष्कार संयोग से हुआ है। जब दो पत्थर टक्कराये तो उससे चिंगारी निकली और वहाँ पर जो सूखी पत्तीयों और लकड़ियाँ थी वह जलने लगी।
                                          आगे चलकर आग को अनेकों कामों मे इस्तेमाल किया गया।
                         शुरूआत मे मनुष्य पत्थर का औजार और हथियार बनाता था आरंभ मे मनुष्य बिना मूठ का औजार और हथियार इस्तेमाल मे लाता था फिर उसके बाद औजार और हथियार डंडे से बांध दिया गया (उसे हम मुठ कहते है ) इससे उन्हे औजार और हथियार का उपयोग करने मे बड़ी सहुलीयत मिली।
                            आरंभिक इतिहास मे पत्थरो का इस्तेमाल बहुत हुआ है इसलिए हम इसे पाषाण युग कहते है।
                 इस्तेमाल किये गये पत्थरों के आधार पर पाषाण युग को तीन भागों मे बाँटा गया है।

(1) पुरापाषाण युग
(2) मध्य-पाषाण युग
(3) नवपाषाण युग

(1) पुरापाषाण युग लगभग बीस लाख साल से 14000 साल पहले तक को कहते है। इस युग मे गिट्टी-नुमा औजार , हाथ की कुल्हाड़ी, चीर-फाड़ का औजार इस्तेमाल किया गया।
(2) मध्य-पाषाण युग लगभग 14000 साल पहले से 8000 साल पहले तक को कहते है। इस युग मे छेद करने वाले, तीर के नोक , खुरचनी आदि का इस्तेमाल किया गया
(3) नवपाषाण युग लगभग 8000 साल से 3000 साल तक को कहते है। इस युग मे नोकदार , चंद्रकला के आकार के और खुरचने वाले औजार आदि का इस्तेमाल किया गया।

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